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छत्तीसगढ़

खाद वितरण व्यवस्था पर प्रशासन की कड़ी निगरानी, किसानों को समय पर उपलब्ध होगा उर्वरक: कलेक्टर

जिले में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण, कालाबाजारी रोकने विशेष निगरानी दल सक्रिय

धमतरी ; आगामी खरीफ सीजन को दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए व्यापक एवं सुव्यवस्थित तैयारियां की गई हैं। कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले में उर्वरक एवं बीज के भंडारण, वितरण और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है, ताकि किसानों को खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

कृषक संगठनों एवं किसानों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने सहकारी समितियों एवं निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। वर्तमान में जिले की 96 सहकारी समितियों में 7,313 क्विंटल बीज का भंडारण किया जा चुका है, जबकि सहकारी एवं निजी क्षेत्र में कुल 28,241 मीट्रिक टन उर्वरक किसानों के वितरण हेतु उपलब्ध है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यूरिया, डीएपी सहित अन्य आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक जिले में मौजूद है तथा किसानों की मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति की जा रही है।

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने कहा कि कृषि जिले की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है और किसानों की सुविधा एवं हितों की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज उपलब्ध कराने, पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है।
कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि खाद-बीज वितरण व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उर्वरकों एवं बीज की कालाबाजारी, जमाखोरी तथा नकली उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर विशेष जांच दल (उड़नदस्ता) गठित किए गए हैं, जो सतत निरीक्षण कर रहे हैं।

अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जा रही है।प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को अपने निकटतम क्षेत्र में ही आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ-साथ निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से भी पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई गई है, जिससे किसानों को अनावश्यक दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और समय पर उर्वरक प्राप्त हो सकेगा।
वैश्विक परिस्थितियों एवं संभावित आपूर्ति चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने उर्वरकों के वैकल्पिक उपयोग को भी बढ़ावा दिया है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे आधुनिक एवं प्रभावी विकल्प किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका उपयोग आवश्यकतानुसार किया जा सकता है।
उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा हरी खाद के रूप में मूंग एवं ढैंचा बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही नील हरित काई, गोबर खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग के प्रति भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सुशासन तिहार एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित शिविरों में किसानों को जैविक एवं संतुलित पोषण प्रबंधन संबंधी जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं तथा खरीफ सीजन के दौरान खाद-बीज की उपलब्धता, गुणवत्ता एवं वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का प्रत्येक किसान समय पर, उचित मूल्य पर और निर्धारित गुणवत्ता का कृषि आदान प्राप्त कर सके।
वही कृषि विभाग  के अधिकारियों ने भी किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रय केंद्रों से ही खाद-बीज क्रय करें तथा कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसाओं के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाएं। किसी भी प्रकार की अनियमितता, कालाबाजारी या अधिक मूल्य वसूली की जानकारी तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला नियंत्रण कक्ष को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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